कृष्णजन्म दिवस
आज जन्माष्टमी है आज के ही दिन मानवता का उद्धारक ,धर्म संस्थापक , गीता के उपदेशक और पूर्णावतार श्रीकृष्ण चन्द्र का जन्म काली अन्धकार से परिपूर्ण और भीषण वर्षा में पानी से सराबोर पृथ्वी पर अवतरण हुआ ५००० वर्ष पूर्व पीड़ित मानवता को तो शायद अंदाज़ भी नहीं था कि किस युगपुरूष का पदार्पण हुआ है किसके पादस्पर्श से धरती पुण्य सलिला हो गयी है धन्य होगई है . वसुदेव को पता था पर वह भी उसे साधारण नवशिशु समझ रहे जो आकाशवाणी के अनुसार कंस के अत्याचार से मुक्ति दिलाएगा और आठंवाँ पुत्र होने के कारण कंस कारागार से मुक्ति दिलाएगा .देवकी को क्या मालुम था कि वह उसे अपने पुत्र को एक बार भी स्तनपान न करवा पायेगी . एक बार भी अपने नवजात शिशु का दर्शन नहीं कर पायेगी . बाबा नन्द को कहाँ पता था की ईश्वर ने उनको मानवता के पूर्ण कल्याणकर्ता के पालन पोषण का भार दिया है बाबा नन्द समझ रहे थे कि उस शिशु की सुरक्षा का भार उन पर है .कितने भ्रम में उस मायापति ने सब को रखा था . इसीलिये तो गोपियाँ उसको छलिया कहती थीं तो गलत थोड़े कहतीं थी . उन्होंने तो सरल बुद्धि से पहचान लिया था . जासोदा मैय्या भी कहाँ पहचान पायी थे नईं तो क्या डंडे से डराती ,? उसको / जो मानवता का भय दूर करने आया था . उसको किससे भय ?
कोइ भी तो नहीं समझ पाया था उसको . शैशव से लेकर आखिर तक मृत्यु पर्यंत . ज़रा भी तो यही समझा था ना कि हिरन के मुख पर निसाना साध रहा हूँ . बलदाऊ तो आखिर तक भी नहीं समझ पाए थे . इसीलिए आखिर वक़्त में भी यादवों को बचाने में लगे थे उन्हें भी कहाँ पता था की बचाने वाला तो मुख मोड़ चुका है अब तो सिर्फ कटे हुए सर और धड़ शराब पीकर एक दूसरे को मार रहे हैं . कैसे समझते ? अहंकारी जो थे .
इस कृष्ण ने अपने मित्रों को सबसे जादा धोखा दिया . अर्जुन भी उसे सखा कह कर यादव २ कहता रहा . हास परिहास करता रहा . गीता ज्ञान के बाद भी कहाँ समझ पाया था . अगर समझ पाता तो क्यों शकुनी पर क्रोध करता क्यों उस धृष्टदयुमन पर क्रोध करता . उसने किसी को नहीं छोड़ा जिसको लगा की ये मेरा है उस पर अधिकार जताने लगा उसे बिलकुल नहीं छोड़ा . देखा नहीं गोपियों का क्या हाल कर दिया था . अभी भी यही करता है पर लोग हैं कि मानते नहीं . बाज नहीं आते . पता नहीं क्या आकर्षण है .
कहते हैं कि जिसके मुख पर पानी है उसकी ओर स्वाभाविक आकर्षण होता है . मन आकर्षित हो ही जाता है . तो इस सांवले रंग वाले में क्या आकर्षण है कि निगाहें मन टिक ही जाती है .इसका कोइ सम्बन्ध जल से है तो जरूर . पैदा हुआ तो वर्षा ऋतू में भादव के महीने में अंधेरी रात में और बारिश की झड़ी में . बिजली की कडकडाहट में जैसे वसुदेव को रास्ता दिखा रहा हो . और कालिंदी तो जैसे प्रतीक्षा कर रही थी उसका जल भी काला और शिशु का वर्ण भी काला . पाँव छूने को आतुर क्या उसे डर था या प्रार्थना कर रही थी की कहीं भाई यम को बहुत कार्य न करना पड़े . पर वह कहाँ माना महा भारत में तो अंक कम पड़ गए गिनती छोटी पड़ गयी और रही सही कसर मृत्यु पूर्व यादवों के संहार में पूरी कर दी .वो तो रिश्तेदार थे कुटुम्बी थे . ? थे कि नहीं .
पर ये तो लगता है कि इसका जल तत्व से कोइ तो सम्बन्ध है जरूर .
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